यंग उत्तराखंड अपने प्रयासों की कड़ी में उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे लोगों के बीच

(चंद्रकान्त नेगी का सस्मरण………   )

यंग उत्तराखंड अपने प्रयासों की कड़ी में एक बार फिर से इस प्राकृतिकआपदा से जूझ रहे लोगों के दुखों को बांटने का एक और प्रयास के लिए उत्तरकाशी से १० -१२ कि०मी० आगे स्थित २ गाँव ढासड़ा एवं सेखू तक आपदा सामग्री के साथ पंहुचा। इस प्रयास को यंग उत्तराखंड और सामाजिक संस्था शांति सहयोग के संयुक्त तत्वाधान में संपन्न किया गया।

सुबह ७ बजे ऋषिकेश से चंबा के लिए रवाना हुए ही थे की ज्ञात हुआ की आगराखाल के पास रोड छतिग्रस्त है तो ऋषिकेश से मंसूरी – जौनपुर होते हुए उत्तरकाशी की तरफ रवाना हुए। कई जगह सड़कों के छतिग्रस्त होने के कारण टीम ३ बजे बन्द्र कोट तक पहुची तो वहां एक जगह सड़क पूरी तरह छतिग्रस्त थी और ५-६ घंटे से सड़क निर्माण का काम चल रहा है था। चार घंटे प्रतीक्षा करने के पश्चात टीम रात्रि ९ बजे गंगोरी पहुची जहाँ टीम ने विश्राम किया। सुबह ८ बजे टीम ढासड़ा एवं सेखू गाँव के लिए संगम चट्टी की और रवाना हो रही थी की तभी पता चला कि वह सड़क भी कई जगह छतिग्रस्त है और गाडी लेकर जाना संभव नहीं है। तभी हमने उत्तरकाशी में हमारे एक रिपोर्टर मित्र से संपर्क कर दोनों गाँव संपर्क किया गया। गाँव के ग्राम पंचायत सदस्य कमल सिंह द्वारा पता चला की गंगोरी ८ – १० कि. मी . लोगों का आना मुश्किल है। तभी हमारे मित्र और जिनकी गाड़ियाँ लेके हम गए थे उन्होंने ने हिम्मत बटोरी और कहा की वे किसी भी हालत में गाडी संगम चट्टी तक लेके जायेंगे। गंगोरी से संगम चट्टी निकलते हुए बहुत जगह भू -संखलन एवं संडको पर बरसाती नदी बहने के कान गाड़ियाँ २ जगह फंस गयीं और गाड़ियों को बड़ी मुस्किल से निकालने के बाद गाडी दिगला पुल तक ही जा पायी जहाँ से आगे की सड़क पूरी तरह गायब थी।

एक बार पुनः गाँव वालों से संपर्क कर उन्हें सूचित किया की टीम दिगला पुल पर है और वहां से क्या किया जाये? गाँव वालों ने कहा की वहां एक मेडिकल कैंप लग रहा है तो लोग वहां आ रहे हैं और दिगला पुल मात्र २-३ कि. मी . है और सभी गाँव वाले वहां आ सकते हैं। ज्ञात हो की ढासड़ा एवं सेखू गाँव के मकान भ-संखलन की वहज से बहुत कमज़ोर हो गए हैं और लोग गाँव से दूर छानियों (जानवरों के रहने की जगह) में रहने को मजबूर है। रास्ट्रीय राजमार्ग न होने के कारण इन गाँव में नाम मात्र की राहत सामग्री पहुच रहे हैं और उसके लिए भी उनकों गंगोरी आना पड़ रहा है। गाँव के ग्राम प्रधान से मिल कर दोनों गाँव के परिवारों की लिस्ट बनायी गए जो की प्रधान जी के पास गाँव के परिवारों के रिकॉर्ड का रजिस्टर था। उसके पश्चात सभी परिवारों को टोकन दिए गए और दोपहर 1२ बजे तक अधिकतर ग्रामीण पहुच गए थे तो राहत सामग्री टोकन के आधार पर बांटना शुरु किया गया और ३ बजे तक राहत सामग्री का सम्पूर्ण वितरण हो चूका था लेकिन हमारे पास दूसरी सामाजिक संस्था द्वारा लाई गयी कुछ महत्वपूर्ण दवाएं थी उनका वितरण कैंसे हो समझ नहीं आ रहा था। तभी रिलाइन्स द्वारा वहां एक मेडिकल टीम आ गए और उन्होंने वहां अपना कैंप लगाना शुरू किया जो की ४ दिन का था। संस्था के सदस्यों से बात करने और डाक्टरों की टीम को दवाए दिखने के पश्चात पूरे दल ने हम लोगों का हार्दिक धन्यवाद किया की जो दवाएं वो नहीं लाये थे (खासकर बच्चों से सम्बंधित रोग) उनके लिए एक बड़ी राहत बन के ये दवाएं आयी। हमारे रिकॉर्ड के अनुसार १३८ परिवारों को राहत सामग्री वितरित की गयी जिसमे मुख्य सामग्री, त्रिपाल, कम्ब्बल, छतरी, साडी शौल, टॉर्च, साबुन, टूथ पेस्ट टूथ ब्रश, वाशिंग पाउडर, तौलिये, तेल, मोमबत्ती, माचिस, चीनी, चाय पत्ती, दूध पाउडर , क्रीम इत्यादि थी त्रिपाल और कम्बल अन्य सामग्रियों के साथ अति प्रभावित एवं गरीब ५८ परिवारों को बितरित किये गए। शेष परिवारों को अन्य उपरोक्त सामग्री दी गयी।

ग्राम प्रधान श्री बलबीर सिंह ने बताया की गाँव के लोग बुरी हालत में जी रहे हैं और आज सरकार की तरफ से एक टीम गाँव के सर्वे के लिए आयी हैं तथा उन्होंने यंग उत्तराखंड और शांति सहयोग का बहुत बहुत धन्यवाद किया टीम ४ बजे गंगोरी से चंबा के लिए निकल पड़ी एवं रात्रि ८ बजे चंबा पहुची एवं अगले दिन सुबह मंसूरी देहरादून के रास्ते होते हुए रविवार रात ११ बजे दिल्ली पहुच गयी। इस सहायता के लिए यंग उत्तराखंड सभी दानदाताओं, कैंप में गये सभी सदस्यों एवं शांति सहयोग की टीम का हार्दिक धन्व्याद करता है|

टीम सदस्य (यंग उत्तराखंड ) चन्द्रकान्त नेगी , विपिन पंवार, के. सी. एस. रावत एवं सोहन पाल राणा ………..

टीम सदस्य (शांति सहयोग ) कमलेश प्रसाद, ऋतू , रवि एवं कपिल……..